सम्पादक :- दीपक मदन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, प्रशासन और तत्काल जनसेवा का प्रभावशाली उदाहरण है। इस कार्यक्रम के तहत राज्य के सभी 13 जिलों में लगातार जनसेवा शिविरों के आयोजन में आम नागरिकों के सहयोगियों का समाधान उनके द्वार पर सुनिश्चित किया जा रहा है। कार्यक्रम के तहत आज 19 जनवरी 2026 तक प्रदेशभर में कुल 395 शिविर आयोजित किये गये, जिनमें 3 लाख 22 हजार 585 से अधिक नागरिकों ने प्रतिभागिता की। इन शिविरों के माध्यम से कुल 32 हजार 746 एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 22 हजार 173 मामलों का अत्यधिक भुगतान किया गया। यह आंकड़े राज्य सरकार की राष्ट्रीय, स्वामित्व वाली तत्परता और जनसमस्याओं के प्रति खंड को स्पष्ट रूप से महत्व देते हैं। शिविरों के दौरान विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक इंजीनियरों और अन्य संरचनाओं के लिए कुल 43 हजार 418 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि विभिन्न जन कल्याण योजनाओं से 1 लाख 75 हजार 258 नागरिकों को सीधे तौर पर लाभ मिला। यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुश्ते जिलावार आंकड़ों पर नजर डाली गई तो जनजाति, जनजाति, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, आश्रम और आश्रम जैसे जिलों में बड़ी संख्या में नागरिकों की भागीदारी दर्ज की गई। अकेले संयुक्त राज्य अमेरिका में 41,889 नागरिकों ने ज्वालामुखी में शिविर लगाए, जबकि हरिद्वार में 64,686 लोगों ने पहली बार लाभ उठाया। उधम सिंह नगर में 24,421 और 24,771 नागरिकों को अलग-अलग मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री पी. सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनता के साथ सरकार के विश्वास का सेतु है। इस पहल में यह सिद्ध किया गया है कि जब सरकार स्वयं जनता के बीच संवाद करती है, तो केवल समस्याओं का समाधान नहीं होता है, बल्कि शासन के प्रति जनविश्वास भी होता है। राज्य सरकार का यह अभियान उत्तराखंड में सुशासन का एक नया कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है, जिसमें संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुस्र्ष सिंह धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम आगे भी जारी रहेगा और उत्तराखंड को जन कल्याण क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा।
