सम्पादक :- दीपक मदन
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वज फहराने वाले सभी प्रदेशवासियों एवं सचिवालय में उपस्थित अधिकारी कर्मचारियों को गणतंत्र दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का उद्घाटित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि हम सब यहां भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के एक अत्यंत गौरवपूर्ण एवं पावन पर्व में शामिल हुए हैं। इस दिन केवल एक दृष्टिकोण की तारीख नहीं है, बल्कि वह महान संकल्प, संघर्ष और दूर का प्रतीक है, जिसके बल पर भारत ने स्वयं को एक संप्रभु, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में प्रतिष्ठित किया है। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन, 26 जनवरी 1950 को, भारत ने अपने संविधान को अंगीकार कर यह घोषणा की थी कि इस देश की सत्ता का अंतिम स्रोत उसकी जनता होगी। ऐसा तब हुआ जब सदियों की दासता के बाद भारत को एकमात्र राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं मिली, बल्कि संवैधानिक स्वराज भी प्राप्त हुआ।
संविधान ने हमें अधिकारों के साथ-साथ अपने सिद्धांत का बोध कराया
मुख्य सचिव ने कहा कि हमारा संविधान केवल विधान का संकलन नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, आत्मा और चरित्र का दर्पण है। डॉ. भीमराव ओबामा के नेतृत्व में इस संविधान का निर्माण किया गया – हमें न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधनवाद से जोड़ा गया है। संविधान में हमें अधिकार दिये गये हैं, लेकिन उन्हें और भी अधिक मानवता का बोध होता है।
प्रत्येक अनारक्षित कार्मिक का सेवक है
मुख्य सचिव ने कहा कि हमें यह याद रखना चाहिए कि हम सिर्फ किताबों का काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम जनता के सेवक हैं। हमारी हर नीति, हर नीति और हर निर्णय प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी नागरिक के जीवन को प्रभावित करता है। इसलिए प्रशासन में प्लांट, प्लांट और प्लांट केवल शब्द नहीं, बल्कि हमारा आचरण होना चाहिए। उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, त्याग और स्वप्न की उपज है। यह मूँगफली की आँखों में एक सपने का परिणाम है, जिसमें आपके बच्चों के आंदोलन को दर्शाया गया है। यह युवाओं की आहुति का फल है, युवाओं ने बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष किया।
विधानमंडल राज्य की नीति की दृष्टि, अलगाव से शासन का संदेश अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड के लिए राज्य निर्माण का वर्ष 2026 अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह रजत जयंती के बाद का नवोन्मेषी चरण है, जहां हमें अतीत से लेकर भविष्य की शिक्षा और अधिक अर्थशास्त्र बनाया गया है। उत्तराखंड सचिवालय राज्य की नीति देखें। प्रतिभागीता से योग्यता का जन्म विवरण है, प्रतिभागीता से विकास की दिशा तय होती है और योग्यता से शासन का संदेश अंतिम व्यक्ति तक निर्धारित है। उन्होंने अपने सिस्टम पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि सचिवालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारीगण अपनी-अपनी कर्तव्यनिष्ठा, कर्मठता एवं कर्तव्यनिष्ठा से राज्य को नई ऊंचाई तक ले जाने में निरंतर योगदान दे रहे हैं। चाहे आप नीति निर्माण से जुड़े हों, वित्त प्रबंधन में हों, संस्थान में हों या सहायक सेवाओं में हों—हर भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज का युग केवल सिद्धांतों की घोषणा का नहीं, बल्कि प्रभाव का युग है। नागरिक यह नहीं चाहते कि उनके जीवन में क्या बदलाव आये।
अनुशासित, समयबद्धता, नागरिकों के प्रति सम्मान और नैतिक आचरण हमारी पहचान बने
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड शासन ने पिछले वर्षों में ई-एवेंटेंस, डिजिटल सेवाओं का विस्तार, रिजल्ट भर्ती प्रक्रियाएं, जन कल्याण मंजूरी की साम्यबद्धता परिषद और क्रांतिकारी सुधारों की दिशा में काम किया है। फिर भी, हमें यह स्वीकार करना होगा कि सुशासन एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें निरंतर आत्ममंथन की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि बिना कर्मचारियों के कोई भी सरकार सफल नहीं हो सकती। सचिवालय का प्रत्येक कर्मचारी-चाहे अधिकारी हो या सहायक-राज्य की सरकारी दस्तावेज का अनिवार्य अंग है। मैं आपको बताता हूं कि शासन के लिए आपकी क्षमता-संवर्धन, कल्याण और कार्य-संतुलन की आवश्यकता है। साथ ही, मैं आपसे निर्देश, समयबद्धता, नागरिकों के प्रति सम्मान और नैतिक आचरण हमारी पहचान का विशेषज्ञ हूं।
विकसित भारत @2047 का संकल्प केवल केंद्र सरकार का नहीं, बल्कि हर राज्य और हर कर्मचारी का साझा संकल्प है
मुख्य सचिव ने कहा कि भारत आज विश्व का सबसे युवा देश है, और उत्तराखंड भी इस ऊर्जा से समृद्ध है। युवा ऊर्जा यदि सही दिशा में प्रवाहित हो, तो अप्रभावी होना भी संभव है। आज प्रशासन में केवल सहायक उपकरण नहीं, बल्कि एक अनिवार्य उपकरण बनाया गया है। आर्टिफिशियल क्लिनिक, डेटा एनालिटिक्स और वैलेंस टेबल्स शासन को अधिक तेज, रिजल्ट और कमजोर बनाए जा रहे हैं। हमें टेक्नोलॉजी से डरना नहीं, बल्कि उसे मानवीय भावनाओं के साथ जोड़ना है। भारत आज ग्लोबल मंच के साथ मिलकर आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत @2047 का संकल्प केवल केंद्र सरकार का नहीं, बल्कि हर राज्य और हर कर्मचारी का साझा संकल्प है।
संकल्प: उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे
मुख्य सचिव ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें स्मरण दिलाता है कि हम स्वतंत्र हैं, क्योंकि हमारे आग्रह ने हमारी स्वतंत्रता का परिवर्तन किया है। हम सुरक्षित हैं, क्योंकि हमारे सैनिक धारक दिनांक पर हैं। और शासन इसलिए चल रहा है, क्योंकि आप सभी अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभा रहे हैं। इस गणतंत्र दिवस पर हमारा यह कहना है कि हम संविधान की मर्यादा को सीमित रखेंगे, जनता की सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानेंगे और उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य बनाएंगे, कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
इसमें प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, एल फनई, आर मीनाक्षी सुंदरम, सभी सचिवगण, अपर सचिवगण सचिवालय के अधिकारी कर्मचारी एवं उनके सदस्य उपस्थित थे।
