सम्पादक :- दीपक मदान
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, शिव कॉलोनी रानीपुर में आज “विराट हिंदू सम्मेलन” का भव्य आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि संत डॉ. स्वामी. दयामूर्त्यानंद एवं विशिष्ट अतिथि रोहिताश (विभाग संपर्क प्रमुख, हरिद्वार) की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य आकर्षण संत स्वामी डॉ. दयमूर्तिआनंद, रोहिताश, नीति गुप्ता, सुदीप, योगेन्द्र, नेता, अजय शर्मा (विद्यालय प्रबंधन), वकील शर्मा, जगदीप और विद्यालय के चिकित्सक लोकेंद्र दत्त अंथवाल द्वारा मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन और गुरु रविदास को नमन किया गया।

बौद्धों का परिचय मनमीत (बौद्धिक प्रमुख, रानीपुर) ने किया। स्वस्ति वाचन वैभव, मनीषी, शास्त्री तथा जोशी ने किया। इसके बाद विद्या मंदिर की नक्षत्रों ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर आधारित आकर्षक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया।

रानीपुर बस्ती के बच्चों ने भी रासलीला, हनुमान चालीसा पाठ, नाथ शंभु भोले नृत्य और भारत माता की आरती जैसे मनमोहक प्रस्तुतिकरण रचनाएं शामिल कीं, जिनमें सम्मिलित जनसमूह ने प्रचुर मात्रा में वर्गीकरण किया। मुख्य वक्ता संत स्वामी डॉ. दयामूर्तिानंद ने स्वामी विवेकानंद के प्रवचन को प्रकाश में डाले गए वेदों की महत्ता पर प्रकाश डाला और सभी को विवेकानंद के प्रसिद्ध “स्वदेश” मंत्र के निषेध की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि हमें विदेशी भेष त्यागकर स्वदेशी वेष अपनाना चाहिए, संप्रदाय को नहीं भूलना चाहिए, घर का बना शुद्ध भोजन ग्रहण करना चाहिए, पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए पॉलीथिन मुक्त अभियान चलाना चाहिए और नागरिक निर्देश और कुटुंब एकता को मजबूत करना चाहिए। उन्होंने संघ की परंपरा की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि नियमित शाखा में युवा और बाल राष्ट्रभक्ति, अनुदेश और स्वदेशी भावना को मजबूत करें। विदेशी बौद्धों के बहिष्कार और स्वदेशी वाद-विवाद की अपील। साथ ही

पर्यावरण संरक्षण, परिवार की एकता और हिंदू समाज की एकता शक्ति को बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र को सर्वोपरि रखने के साथ एकजुट होकर आगे की स्थापना करनी होगी। कार्यक्रम के अंत में शिशु मंदिर मंदिर के विद्वान कमल रावत ने सभी प्रवेश, जाति और सम्मिलित जनसमूह के प्रति हार्दिक स्वागत और सदस्यता भागीदारी की। सम्मेलन में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे और सभी ने हिंदू संस्कृति एवं स्वदेशी परंपरा पर अहिंसा का संकल्प लिया।

