सम्पादक :- दीपक मदान
गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल रिवाल्वर सिंह (से.नि.) ने रविवार को हरिद्वार में प्रेस क्लब, हरिद्वार द्वारा ”हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी समारोह” का आयोजन किया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभागिता की गई। इस अवसर पर उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक, सामाजिक और योगदान पर अपने विचार साझा किये। उन्होंने ‘उदंत मार्तण्ड’ के प्रकाशन से आरंभ हुई हिंदी पत्रकारिता की यात्रा को राष्ट्र को अस्वीकृत करने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद की नहीं, बल्कि भारत की भावना, संस्कृति और आत्मा की अभिव्यक्ति है। राज्यपाल ने कहा कि हिंदी साहित्य सत्य, विवेक और नैतिकता के साथ प्रश्नोत्तरी है और भाषा की अभिव्यक्ति केंद्र में है, यही लोकतंत्र की वास्तविक अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल सत्ता परिवर्तन नहीं थी, बल्कि सभ्यता के पुनर्जागरण और नवभारत के निर्माण का संकल्प था। इस संकल्प को आगे बढ़ाने में हिंदी पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यपाल ने कहा कि आज डिजिटल युग में मीडिया का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, लेकिन पत्रकारिता का मूल धर्म होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी साहित्य पौराणिक कथाओं की प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के संप्रदाय की आवाज, नारी सम्मान की संवाहक और सामाजिक सुधार की शुरुआत है। हरिद्वार की आध्यात्मिक भूमि का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह नगर केवल तीर्थ नहीं, बल्कि भारत का एकमात्र केंद्र है। वर्ष 2025 में हरिद्वार में आए थिएटर थिएटर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऋषभ की यह जिम्मेदारी है कि वे अपनी कृति के माध्यम से करोड़ों लोगों तक सकारात्मक, राष्ट्र निर्माण का संदेश दें। उन्होंने मीडिया से यह भी पूछा कि वह शहर की सफाई व्यवस्था के लिए जन निगमों का बीड़ा पेंडेंज बना रहे हैं। राज्यपाल ने अनुरोध किया है कि वे 2047 तक विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व गुरु बनाने के लिए अपने दायित्वों को स्वीकार करें। मुख्य वक्ता के रूप में निर्मल पाठक ने ”आजादी के बाद राष्ट्र स्थापना में हिंदी साहित्य” विषय पर अपने विचार रखे। सिंह डोभाल ने पुष्प गुच्छ उद्योगपति महामहिम राज्यपाल का स्वागत किया। प्रदीप जोशी, काशीराम सचिव काशीराम पोलिसी, सांस्कृतिक सचिव आशु शर्मा, रेस्टलेस दीपक मिश्रा सहित तीर्थयात्री समिति के सदस्यगण और कई रागी लोग उपस्थित रहे।
