हरिद्वार, 04 अगस्त 2026
पावन कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार में अपनों से बिछड़ी एक मूक-बधिर महिला सुमन को उनका परिवार सकुशल मिल गया है। इस पूरी प्रक्रिया में देवभूमि बधिर एसोसिएशन की प्रदेश प्रवक्ता एवं साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट सोनिया अरोड़ा और इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार) के एक्जीक्यूटिव काउंसिल सदस्य संदीप अरोड़ा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।

सांकेतिक भाषा बनी अपनों तक पहुंचने का जरिया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुमन पिछले कुछ दिनों से कांवड़ मेले में बिछड़ने के बाद बहादराबाद स्थित ‘वन स्टॉप सेंटर’ में सुरक्षित रह रही थीं। सुमन के ससुर राजकुमार अपने बेटे करन और बहू की तलाश में भटकते हुए हरिद्वार पहुंचे, जहां उन्हें सूचना मिली कि उनकी बहू वन स्टॉप सेंटर में हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनिया अरोड़ा और संदीप अरोड़ा तुरंत मौके पर पहुंचे। मूक-बधिर होने के कारण महिला सामान्य बातचीत में असमर्थ थी, ऐसे में सोनिया अरोड़ा ने साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) के माध्यम से सुमन से संवाद स्थापित किया। सोनिया अरोड़ा ने इशारों में ही सेंटर पर आए व्यक्ति के बारे में पूछा, जिस पर सुमन ने स्पष्ट रूप से समझाया कि ये उनके पति के पिता (ससुर) हैं। इसके बाद सोनिया अरोड़ा ने सुमन से उनके साथ जाने की सहमति भी सांकेतिक भाषा में ही प्राप्त की।

संतुष्टि के लिए संदीप अरोड़ा ने ससुर से मूक-बधिर पति करन का मोबाइल नंबर लेकर वीडियो कॉल से संपर्क करने का भी प्रयास किया, हालांकि फोन स्विच ऑफ होने के कारण संपर्क नहीं हो सका।
पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में हुई सुपुर्दगी
सोनिया अरोड़ा द्वारा की गई इस कुशल काउंसलिंग और पूरी तसल्ली के बाद कनखल पुलिस और वन स्टॉप सेंटर संचालक मूक-बधिर महिला सुमन तथा उनकी बेटी शिवानी को उनके ससुर राजकुमार को सौंपने के लिए पूरी तरह संतुष्ट हुए।
इस मानवीय और सराहनीय अवसर पर थाना कनखल से महिला कांस्टेबल प्रियंका व सुमन चौहान, वन स्टॉप सेंटर से पैरालीगल एडवोकेट टीनू शर्मा, केस की जांच के लिए नियुक्त सदस्य ज्योति सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
