दीपक मदान
देहरादून /शराब कारोबार की आड़ में सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और चुनावी माहौल के ठीक मुहाने पर प्रशासनिक व्यवस्था को अस्थिर करने का कुचक्र अब एक ऐसे व्यक्ति पर भारी पड़ता नजर आ रहा है, जिसने अपनी ओछी बयानबाजी से देवभूमि की गरिमा को आहत करने का दुस्साहस किया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के जरिए कथित रूप से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आबकारी अधिकारियों की छवि को धूमिल करने वाले इस विवादास्पद व्यक्ति के खिलाफ अब पूरा शराब व्यापारी वर्ग खुलकर सड़क पर उतर आया है। झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाने वाले इस शख्स के कृत्यों से आक्रोशित कारोबारियों ने तुरंत कड़ी धाराओं में FIR दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी है।

मुख्यमंत्री और आबकारी महकमे पर अनर्गल प्रहार का कुत्सित प्रयास
सामने आए इस दुर्भावनापूर्ण वीडियो में इस व्यक्ति ने न केवल साथी कारोबारियों पर बेबुनियाद वसूली के इल्जाम लगाए, बल्कि राज्य के मुखिया की छवि को आहत करने के लिए एक प्रायोजित प्रोपेगैंडा भी चलाया। यह कोई सामान्य बयानबाजी नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ और सनसनी फैलाने के उद्देश्य से गढ़ा गया एक ऐसा षड्यंत्र है, जिसने प्रदेशभर के लाइसेंसधारी शराब कारोबारियों का खून खौला दिया है। व्यापारियों का स्पष्ट मानना है कि इस तरह के अराजक तत्व अपनी व्यक्तिगत विफलताओं को छुपाने के लिए सिस्टम को बदनाम करने का घटिया खेल खेल रहे हैं।
सिंडिकेट राज का खात्मा और पारदर्शी आबकारी नीति
नैनीताल के प्रतिष्ठित शराब कारोबारी मारुतिनंदन शाह ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए दो टूक शब्दों में कहा है कि जब से प्रदेश में नई और पारदर्शी आबकारी नीति लागू हुई है, तब से शराब कारोबार में जड़े जमा चुके पुराने और माफियानुमा सिंडिकेट्स का पूरी तरह सफाया हो चुका है।

आम व्यापारियों को मिला हक: इस नई व्यवस्था के चलते अब छोटे और स्थानीय आबकारी व्यापारियों को भी बिना किसी डर या दबाव के स्वतंत्र रूप से कारोबार करने का उचित अवसर और लाभ मिल रहा है।
बौखलाहट का नतीजा: जो लोग पहले एकाधिकार के बल पर अपनी मनमानी चलाते थे, वे आज इस पारदर्शी व्यवस्था से बौखलाए हुए हैं और ऐसे ही हथकंडों के सहारे प्रशासन पर अनुचित दबाव बनाने का असफल प्रयास कर रहे हैं। हवाई और आधारहीन आरोपों की बजाय ऐसे चरित्रहीन लोगों के पुराने आपराधिक और संदिग्ध इतिहास की गहराई से उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और त्वरित कानूनी शिकंजा
सरकार और आबकारी विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया के किसी भी वायरल शोर या वीडियो की लोकप्रियता के आधार पर सरकारी नीतियां या कार्रवाई तय नहीं होतीं। प्रशासन पूरी तरह से ‘जीरो टॉलरेंस’ के संकल्प के साथ काम कर रहा है।

दूसरी तरफ, आबकारी अधिकारियों और मुख्यमंत्री के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले इस व्यक्ति के खिलाफ अन्य लाइसेंसी शराब कारोबारी अब एकजुट होकर कानूनी डंडा चलाने की तैयारी कर चुके हैं। मांग उठाई जा रही है कि ऐसे व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और उस पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर ऐसी कड़ी मिसाल पेश की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सस्ती शोहरत के लिए शासन-प्रशासन और व्यापारियों की प्रतिष्ठा पर कीचड़ उछालने की हिमाकत न कर सके।
सर यह मैंने शुरू से बनाई है एक बार यह वाली पढ़ कर देखना सर
