दीपक मदान
हरिद्वार, 23 जनवरी 2026। सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, सेक्टर-2, भेल रानीपुर में बसंतोत्सव 2026 का आयोजन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। कार्यक्रम में छात्र संसद के सदस्यों के साथ-साथ कन्या भारती के छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ हवन यज्ञ से हुआ। इस अवसर पर कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के कुल 32 सेक्शनों के लिए 32 हवन कुंड बनाए गए थे, जिनमें प्रत्येक सेक्शन से एक-एक अभिभावक यजमान के रूप में शामिल हुए। मुख्य यजमान के रूप में पूर्व छात्र सौरभ सारस्वत जी के साथ प्रियंका जी, प्रियांशु जी, श्याम कुमार

त्यागी जी, सेवानिवृत्त भेल कर्मी देवी प्रसाद गुप्ता जी तथा सेवानिवृत्त अध्यापिका (ऋषि इण्टर कॉलेज) विजय लक्ष्मी गुप्ता जी उपस्थित रहे। हवन यज्ञ का संचालन रुद्र प्रताप शास्त्री जी तथा तारा दत्त जोशी जी ने पुरोहित के रूप में किया। इस यज्ञ के माध्यम से विद्यारंभ संस्कार प्रारंभ किया गया।

कार्यक्रम का संचालन मनीष खाली जी तथा दीप्ति पाठक जी ने कुशलतापूर्वक किया। आए हुए सभी अभ्यागतों का परिचय विद्यालय के वरिष्ठ आचार्य प्रवीण कुमार जी ने कराया।

हवन के पश्चात ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनकी दर्शकों ने खूब सराहना की।

मुख्य अतिथि सौरभ सारस्वत जी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें बहुत गर्व है कि वे इसी विद्यालय के छात्र रहे हैं। उन्होंने बच्चों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों की प्रशंसा करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

विद्यालय के आचार्य देवेश पाराशर जी ने वीर हकीकत राय बलिदान दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए और बताया कि किस प्रकार वीर हकीकत ने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

प्रधानाचार्य ने सभी को बसंतोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा उपस्थित सभी अभ्यागतों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “पतंग तब तक उड़ती है जब तक वह डोर से बंधी रहती है। ठीक उसी तरह भारत का अस्तित्व तभी बना रहेगा जब तक हम अपनी संस्कृति से जुड़े रहेंगे। हमें किसी भी हालत में अपनी संस्कृति नहीं छोड़नी चाहिए।” उन्होंने यह भी सूचित किया कि आज से विद्यालय में नए सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक अभिभावक अपने बच्चों का पंजीकरण करा सकते हैं।

कार्यक्रम में विद्यालय का संपूर्ण परिवार—शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं—उपस्थित रहे। बसंतोत्सव का यह आयोजन विद्यालय की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का एक और उज्ज्वल उदाहरण बन गया।

