सम्पादक :- दीपक मदन
दवा। सचिव आपदा एवं प्रबंध निदेशक विनोद कुमार सुमन ने रविवार को राज्य के विभिन्न आपदा सेंडई फ्रेमवर्क के तहत काम की प्रगति की समीक्षा की। राज्य आपातकालीन औद्योगिक केंद्र में आयोजित बैठक में उन्होंने सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) के लक्ष्य समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने सभी इकाइयों को एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने विभाग का एक्शन पेश करने को कहा। समीक्षा बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन सचिव एवं रेखा विनोद कुमार सुमन ने कहा कि आपदा प्रबंधन से संबंधित जनहानी, प्रभावित लोगों की संख्या, आर्थिक क्षति तथा आर्थिक सेवाओं तथा महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने की दिशा में एक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। इसके प्रभावशाली सचिवालय के लिए राज्य के सभी हिस्सों को अपनी-अपनी आपदा प्रबंधन योजना तैयार करनी होगी और प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन की स्थापना सुनिश्चित की जाएगी। सुमन ने कहा कि सेंडाई फ्रेमवर्क की पहली आपदा जोखिम को दर्शाता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपदा से संबंधित आंकड़ों का संग्रह, विश्लेषण एवं उपयोग अत्यंत आवश्यक है। इसके अंतर्गत आपदाओं से हुई क्षति का वैज्ञानिक आकलन, सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण एवं सांस्कृतिक विरासत पर प्रभाव वाले प्रभाव की समझ, प्रशिक्षण एवं शिक्षा के माध्यम से सभी हितधारकों की क्षमता में वृद्धि और वैज्ञानिक ज्ञान के साथ स्थानीय एवं पारंपरिक संप्रदाय के समन्वय को बढ़ावा दिया जाएगा।
दूसरी ओर, आपदा प्रबंधन को सूचित करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रौद्योगिकी, वित्तीय एवं संस्थागत परिसंपत्तियों को मजबूत करना होगा। भूमि उपयोग, नगर निगम, भवन निर्माण संहिता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों से संबंधित आवेदकों को उनके मापदंडों से प्रमाणित किया जाता है। इसके साथ ही जिला एवं राज्य स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित आबंटन बोर्ड को मजबूत किया जाएगा।
तीसरी आपदा जोखिम न्यूनीकरण में निवेश के संबंध में उन्होंने कहा कि शहरी ग्रामीण क्षेत्रों में जोखिम कम करने के अनुमोदन को बढ़ावा दिया जाएगा। विकास परिभाषा में आपदा जोखिम आकलन, मानचित्रण और प्रबंधन को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है और राज्य की महत्वपूर्ण अवसंरचना और सेवाओं को सुरक्षित बनाने के लिए रणनीति रणनीतियाँ अपनाई गई हैं। साथ ही स्थानीय, जिला एवं राज्य स्तर पर जोखिम न्यूनीकरण समसामयिक संबंधों की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
चैथी प्राथमिकता आपदा के प्रति तैयारी तथा प्रभावी प्रतिक्रिया एवं पुनर्निर्माण को लेकर उन्होंने कहा कि आपदा पूर्व तैयारी, जन-जागरूकता, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा तकनीकी एवं लॉजिस्टिक क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण अत्यंत आवश्यक है। आपदा पश्चात पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण कार्यों में बिल्ड बैक बेटर की अवधारणा को अपनाते हुए भविष्य की आपदाओं के प्रति जोखिम को कम किया जाएगा। इसके अंतर्गत बहु-आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली के सुदृढ़ीकरण तथा चेतावनी के समयबद्ध और प्रभावी प्रसार पर भी बल दिया गया।सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपनी योजनाओं, कार्यक्रमों एवं कार्यों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण से संबंधित प्रावधानों को अनिवार्य रूप से शामिल करें। विभागीय परिसंपत्तियों एवं अवसंरचनाओं पर संभावित खतरों का आकलन, जोखिम कम करने हेतु योजनाओं का विकास एवं क्रियान्वयन, जन-जागरूकता, प्रशिक्षण, शोध एवं क्षमता विकास को प्राथमिकता दी जाए। सेंदाई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु राज्य एवं जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी तथा विभागीय समन्वय के माध्यम से एक सुदृढ़ एवं समग्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण तंत्र विकसित किया जाएगा।बैठक में वरिष्ठ आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ डाॅ. पीडी माथुर ने बताया गया कि सेंडई फ्रेमवर्क के तहत निर्धारित प्रमुख लक्ष्यों में आपदाओं से होने वाली मृत्यु दर में कमी, प्रभावित लोगों की संख्या में कमी, सकल घरेलू उत्पाद के सापेक्ष आर्थिक क्षति में कमी, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अन्य बुनियादी सेवाओं तथा महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं को होने वाले नुकसान में कमी तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को अपनाने वाले विभागों की संख्या में वृद्धि शामिल है। इस अवसर पर संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक डाॅ. शांतनु सरकार, विभिन्न रेखीय विभागों के अधिकारी तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
सेंदाई फ्रेमवर्क के तहत क्या-क्या किया जाना है:-
👉 प्रत्येक विभाग द्वारा विभागीय आपदा प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।
👉 सभी प्रमुख आपदाओं के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया एवं कंटिजेंसी प्लान तैयार किया जाएगा।
👉 प्रत्येक विभाग में आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी।
👉 जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से समन्वय हेतु नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा।
👉 सभी योजनाओं एवं परियोजनाओं में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं जलवायु परिवर्तन अनुकूलन को शामिल किया जाएगा।
👉 विभागीय परिसंपत्तियों का खतरा, जोखिम, संवेदनशीलता एवं क्षमता आकलन किया जाएगा।
👉 सभी भवनों, संरचनाओं एवं अवसंरचनाओं का सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा।
👉 सभी परिसंपत्तियों की GIS आधारित मैपिंग कर उन्हें सुरक्षित तथा असुरक्षित श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।
👉 भवन उपविधि, सुरक्षा मानक, भूमि उपयोग एवं क्षेत्रीय नियमों का कड़ाई से अनुपालन।
👉 भूकंपीय माइक्रो-जोनिंग, बाढ़ एवं भूस्खलन जोनिंग को योजनाओं में शामिल किया जाएगा।
👉 राज्य, जिला एवं विभाग स्तर पर निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा।
👉 सुरक्षा ऑडिट के आधार पर कमजोर अवसंरचनाओं का सुदृढ़ीकरण तथा पुनर्निर्माण किया जाएगा।
👉 सभी नई परियोजनाओं में बहु-आपदा प्रतिरोधी निर्माण तकनीकों को अपनाया जाएगा।
👉 रिटेनिंग वॉल, तटबंध, शेल्टर, बाढ़ सुरक्षा संरचनाओं का निर्माण एवं रखरखाव किया जाएगा।
👉 सभी विभागों द्वारा पूर्व चेतावनी संदेश प्राप्त एवं प्रसारित करने की व्यवस्था की जाएगी।
👉 राहत शिविर, सुरक्षित खुली मंजिल, विक्रेताओं की पहचान एवं पोस्टिंग की जाएगी।
