सम्पादक :- दीपक मदान
गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल रोशन सिंह (से नि) ने शनिवार को हरिद्वार में शांतिकुंज द्वारा आयोजित अनोखे ज्योति शताब्दी समारोह के समापन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभागिता की। इस कार्यक्रम में प्रमुख मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम को प्रदर्शित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह कोई कार्यक्रम नहीं बल्कि युग परिवर्तन का शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि भले ही इसका समापन समारोह कहा जा रहा हो, असल में यह एक नए युग का शुभारंभ है। यह युग स्वयं का महाकुंभ है, जिसने व्यक्ति निर्माण, समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण की नई यात्रा को गति दी है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक स्थल आपके लिए अद्वितीय है और सेवा, दान, साधना एवं प्रज्ञा का संदेश देता है, जो संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा स्रोत है। गवर्नर ने कहा कि इस 51 दिव्य तीर्थयात्रा में संपूर्ण देशवासियों को साधना, सेवा और समन्वय का संदेश दिया गया है। यह केवल एवं धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि आत्मिक नैतिक पुनर्निर्माण का संकल्प है, जिसे प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में स्थापित करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि गायत्री परिवार ने विश्वभर में सेवा एवं संस्कार का जो महत्वपूर्ण कार्य किया है, वह युग परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत आधार बन गया है। 80 से अधिक देशों में फैला हुआ यह आध्यात्मिक आंदोलन, हजारों की संख्या में लोग और भव्य प्रदर्शन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का संदेश दे रहे हैं। राज्यपाल ने शांतिकुंज को एकमात्र आश्रम नहीं बनाया, बल्कि युगतीर्थ और आध्यात्मिक अध्ययन के माध्यम से कहा कि यहां साधना, प्रशिक्षण और सेवा के माध्यम से श्रेष्ठ नागरिक और श्रेष्ठ मानव का निर्माण होता है। उन्होंने वर्तमान नेतृत्व में हो रहे कार्यकलापों के संचालक ने कहा कि गुरुदेव के सिद्धांतों को समसामयिक संदर्भों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गायत्री परिवार कोई साधारण संस्था नहीं है, बल्कि यह संस्कृति की सभ्यता, संस्कारों के सागर और अध्यात्म की आलौकिक आभा है, जो संपूर्ण विश्व को सनातन परंपरा का दिग्दर्शन करा रही है। उन्होंने कहा कि अलौकिक ज्योति साधारण प्रकाश नहीं है, बल्कि यह ऐसी ज्योति है जो बाहर से अधिक प्रकाशित होती है। यह बुद्धि को विवेक से, कर्म को धर्म से तथा जीवात्मा को ईश्वर से जोड़ने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि यह ज्योति अलौकिक प्रतीक है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि संपूर्ण विश्व में अशांति, अराजकता और संघर्ष का दौर चल रहा है। व्यापार को हथियार बनाया जा रहा है और शक्ति के बल पर वर्चस्व स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्य और गायत्री परिवार ही विश्व को शांति और एकता की दिशा में ले जाने में सक्षम हैं। समारोह के दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने इस अवसर पर “सौभाग्य की त्रिवेणी” में गवर्नर के प्रति कृतज्ञता भाषण और समस्त विद्यार्थी साधकों का दायित्व निभाया। दलनायक डॉ. पंड्या ने कहा कि आज आध्यात्मिकता को सोशल मीडिया के ‘लाइक्स’ से आँका जा रहा है, जबकि सच्ची साधना चमत्कार नहीं, परिष्कार का मार्ग है। गुरु अनेक मिल सकते हैं, पर पिता समान गुरु, वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिलते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकाश के लिए छुपे हुए गोले हैं और जिन्हें भगवान ने दिया है,वह कभी खाली हाथ नहीं रहती। अंत में उन्होंने जीवन में भावना विकसित करने की खोज करते हुए साधना और सेवा को सार्थक बनाने का संदेश दिया। इस अवसर पर राज्य मंत्री विनय रोहिला, दुर्गा शंकर मिश्रा, सहायक जिल मृग मित्र, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पी आर चौहान सहित विभिन्न देशों और विश्वविद्यालयों से आये शांति कुंजीपटल के अनुयाई उपस्थित थे।
