सम्पादक :- दीपक मदान
वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 केवल वित्तीय लेन-देन का ऑडिट-जोखा नहीं है, बल्कि यह भारत के दर्शन और वैश्विक मंच के बीच एक मजबूत ‘आर्थिक कवच’ है। मैं जब इस बजट की परतें खोलता हूँ, तो इसमें भविष्य के भारत की तीन स्पष्ट धाराएँ दिखाई देती हैं: स्टार्टअप क्रांति, सामाजिक सुरक्षा और संरचनात्मक संरचना।
1. शिक्षा सुधार: क्वांटम संरचना नहीं, नवप्रवर्तन पर जोर
बजट में 50,000 नई ‘अटल टिंकरिंग लैब्स’ की घोषणा यह है कि सरकार अब ‘कौशल-आधारित’ और ‘रिसर्च-ओरिएंटेड’ शिक्षा के बजाय केवल डिग्री देने वाली शिक्षा की ओर बढ़ रही है। 10,000 नई मेडिकल दुकानों का क्रिएटिव हेल्थ शिक्षा के लोकतंत्र की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कदम केवल प्रतिभा पलायन (ब्रेन ड्रेन) को रोकेगा, बल्कि मध्यम वर्ग के युवाओं के लिए डॉक्टर बनने के सपने को बनाए रखेगा।
2. मध्यम वर्ग और सामाजिक न्याय
इस बजट ने मध्यम वर्ग को ऑक्सीजन दी है, जिसका अर्थ है कि उसे लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। नई कर व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय को प्रभावशाली रूप से कर-मुक्त करना उपभोग (कंजम्पशन) को बढ़ावा देना वाला कदम है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स टैक्स की सीमा को दोगुना करना और गंभीर बटालियन की 36 रेलवे स्टेशनों को शुल्क से मुक्त करना यह साबित करता है कि सरकार ‘वेल स्टेट’ की अपनी भूमिका को पूरा करती है।
3. कुम्भ प्रबंधन और अभिलेख का अंतर्संबंध
एक ऐसे देश में जहां कुंभ जैसे विशाल मानवीय समागम होते हैं, वहां ‘लॉजिस्टिक्स’ और ‘कैनेटिक्स’ सबसे महत्वपूर्ण हैं। बजट में प्रस्तावित 7 नई हाई-स्ट्रीक रेल योजनाएं और 20 राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास कुंभ जैसे आयोजनों के प्रबंधन को वैश्विक स्तर की सुविधा प्रदान की गई है। यह पुरातात्विक ढांचा न केवल पर्यटन को बढ़ावा देने वाला है, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी बुनियादी ढांचे की अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया है।
4. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) की संजीवनी
10,000 करोड़ रुपये के एमएसएमई फंड छोटे उद्यमियों के लिए सुरक्षा चक्र का काम करेंगे। यह रोजगार सृजन के उस बिजनेस को मजबूत बनाना चाहता है जो कोविड के बाद के झटकों से उभर रहा है।
समीक्षात्मक निष्कर्ष
निश्चित रूप से, बजट में राजकोषीय घाटा (राजकोषीय घाटा) को नियंत्रित रखने के लिए विकास की गति को बनाए रखना एक कठिन चुनौती थी, जिसमें वित्त मंत्री काफी हद तक सफल रहे हैं। हालाँकि, इसकी पूर्ण सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि ‘डिजिटल एग्री-स्टैक’ और ‘सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक कितनी तेजी से पहुँचता है।
कुल मिलाकर, यह बजट ‘ज्ञान, विज्ञान और जन-कल्याण’ का एक उत्कृष्ट दस्तावेज है, जो भारत को 2047 के संकल्पों की ओर से संस्थानों से ले जाने का लक्ष्य रखता है।
