सम्पादक :- दीपक मदान
मुख्यमंत्री लक्ष्मण सिंह धामी ने मंगलवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में प्रथम “समान नागरिक संहिता दिवस” का आयोजन किया। इस संस्था पर उन्होंने समान नागरिक संहिता तैयार करने वाले समिति के सदस्यों, कुशल योग्यता प्राप्त करने वाले अधिकारियों और पंजीकरण में योगदान देने वाले वीएलसी को भी नियुक्त किया है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यूसीसी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी का अनावरण भी किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज के दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहें, इसी दिन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू हुई है, जिससे समाज में सामाजिक न्याय, धार्मिक और संवैधानिक पदों की स्थापना सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और परंपरा सदैव समरसता और विकलांगता की संवाहक रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी गीता में “समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः” का उपदेश दिया है, जिसका अर्थ है कि मैं सभी मंत्रों के प्रति समान भाव रखता हूं, न किसी का शत्रु हूं और न ही किसी के प्रति शत्रु हूं। सनातन संस्कृति की यही महानता है, जिसने सदियों से दुनिया को प्रभावित किया, न्याय और मानवता का मार्ग दिखाया है।
सच किया गया संविधान का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने सभी संविधानों में ”समान नागरिक संहिता” को संविधान के सिद्धांत 44 के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों में शामिल किया था। उनका मत था कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून होना चाहिए। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व, अपने दृष्टिपत्र में राज्य में “समान नागरिक संहिता” को लागू करने का संकल्प लिया है। देवभूमि की जनता ने भी इस “देवकार्य” के लिए भाजपा को अपार समर्थन और आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उन्होंने सत्य शक्ति समर्थितते ही पहले दिन से ही उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने का कार्य शुरू कर दिया है। इसी क्रम में 7 फरवरी 2024 को राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता के तहत राष्ट्रपति साररा को भेजा गया। जिसे 11 मार्च 2024 को राष्ट्रपति की मुद्रा मिली। इसके बाद सभी जरूरी नियमावली एवं कानून को पूर्ण किया गया, राज्य सरकार ने 27 जनवरी, 2025 को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को मंजूरी के साथ लागू कर दिया।
महिला संविधान के नये युग की शुरुआत
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि समाज में कुछ समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत भवनों के कारण भेदभाव, असमानता और अन्याय की स्थिति बनी हुई है। यूसीसी लागू होने से न केवल राज्य से सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हुए हैं बल्कि प्रदेश में महिला संरक्षण के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है। अब उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियों को हलाला, इद्दत, बहुविवाह, बाल विवाह और तीन तलाक जैसी कुरितियों से मुक्ति मिली है। यूसीसी लागू होने के बाद उत्तराखंड में एक भी हलाला या बहुविवाह का मामला सामने नहीं आया। यही कारण है कि मुस्लिम महिलाओं ने इस कानून का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कई दशकों तक वोट बैंक की राजनीति के कारण यूसीसी को लागू करने का साहस नहीं दिखाया गया। जबकि विश्व के सभी विकसित एवं सभ्य राष्ट्रों जिनमें प्रमुख मुस्लिम राष्ट्र शामिल हैं, में समान नागरिक संहिता पहले से ही लागू है।
समरसता से लाभ का प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या पंथ के खिलाफ नहीं है बल्कि ये तो समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर सभी नागरिकों में “समानता से समरसता’’ स्थापित करने का एक कानूनी प्रयास है। इस कानून के माध्यम से किसी भी धर्म की मूल मान्यताओं और प्रथाओं को नहीं बदला गया है, केवल कुप्रथाओं को दूर किया गया है। यूसीसी में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह, विवाह-विच्छेद एवं उत्तराधिकार आदि से संबंधित नियमों को एक समान किया गया है। साथ ही संपत्ति के बंटवारे और बाल अधिकारों के विषय में भी स्पष्ट कानून बनाए गए हैं। संपत्ति के अधिकार में बच्चों में किसी भी प्रकार का भेद नहीं किया गया है, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने के पश्चात उसकी संपत्ति को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच किसी प्रकार के मतभेद की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए मृतक की सम्पत्ति पर उसकी पत्नी, बच्चों एवं माता पिता को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय को देखते हुए युवक-युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित के उद्देश्य से इस कानून में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार उनके माता-पिता या अभिभावक को देगा, ये जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जा रही है। लिव-इन के दौरान जन्में बच्चों को उस युगल का बच्चा ही मानते हुए, उसे जैविक संतान के समान समस्त अधिकार प्रदान किए गए हैं।
सिर्फ घोषणा नहीं सफल क्रियान्वयन भी किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये उनके लिए निजी तौर पर अत्यंत गर्व का विषय है कि उन्होंने समान नागरिक संहिता को घोषणा से लेकर धरातल पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करके दिखाया है। उन्होंने कहा कि बीते एक वर्ष में राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता के माध्यम से नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं की पहुँच को और अधिक सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाया है। जहां यूसीसी लागू होने से पहले हमारे राज्य में औसतन केवल 67 विवाह पंजीकरण हुआ करते थे वो संख्या आज बढ़कर प्रतिदिन 1400 से अधिक हो गई है। राज्य की 30 प्रतिशत से अधिक ग्राम पंचायतों में शत-प्रतिशत विवाहित दंपतियों का पंजीकरण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। बीते एक वर्ष में यूसीसी के अंतर्गत लगभग 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 95 प्रतिशत से अधिक का निस्तारण भी किया जा चुका है। राज्य में ऑनलाइन पोर्टल व्यवस्था तथा 7,500 से अधिक सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से शासन को वास्तव में सीधे जनता के द्वार तक पहुँचा दिया है।
विवाह में धोखाधड़ी करने पर सख्ती का प्रावधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में राज्य सरकार ने यूसीसी में आवश्यक संशोधनों से संबंधित विधेयक पारित किया था, जिसे एक दिन पहले ही राज्यपाल महोदय की स्वीकृति प्राप्त हुई है। जिसके अंतर्गत विवाह के समय यदि अपनी पहचान छिपाने या गलत तथ्य बताने पर ऐसे विवाहों को निरस्त करने का प्रावधान है। इसके साथ ही, विवाह एवं लिव-इन संबंधों में किसी भी प्रकार के बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।
देश को जोड़ते हैं मजबूत फैसले
मुख्यमंत्री ने कहा कि दा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित पंडित उपाध्याय ने जनसंघ की स्थापना के समय से ही कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति और समान नागरिक संहिता को लागू करने का संकल्प लिया था, अब यह संकल्प सिद्धि बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह साबित हो गया है कि मजबूत देश को तोड़ते नहीं, बल्कि बेचते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग संविधान समान नागरिक संहिता को लेकर भ्रांतियां फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। राजनीतिक सांस्कृतिक से प्रेरित वाद कभी इसे मूल निवासी तो कभी लिव-इन रजिस्ट्रेशन को लेकर भ्रम फैलाया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति ‘मूल निवासी’ नहीं बन सकता। इसी तरह लिव-इन रिलेशन रजिस्टर का वादा पितृभूमि-बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकार की रक्षा के लिए किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार से मां गंगा देवभूमि उत्तराखंड से बहती हुई पूरे भारत को अभिसिंचित करती है, उसी प्रकार से उत्तराखंड से आरोहण वाली ये “समान नागरिक संहिता” की धारा भी देश के दूसरे राज्यों को इस दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।
बहु विवाह पर सहमति
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कुछ मामले बहु विवाह और विवाह विच्छेद से संबंधित भी सामने आए हैं, ऐसे मामलों में अलग-अलग प्रोविजन करते हुए सख्ती से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी भी अमेरिका के एक प्लास्टर ने उन्हें जिम्मेदार ठहराया है, लेकिन अगर धर्म परिवर्तन, सरकारी जमीन पर दुकान के खिलाफ बात की जाती है तो फिर वो फिर से अच्छा ही है। इस आरोप में कैथोलिक जोशी, डॉ. धन सिंह रावत, बौद्ध मठाधीश, सहायक खजान दास, सचिव सविता कपूर, सुरेश गाड़िया, गिरिजाघर गैरोला, सचिव गृह शैलेश बागोली, प्लास्टिक दीपम सेठ, यूसीसी समिति के सदस्य पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, दून विवि के मुख्य सचिव प्रो. डंगवाल, मनु भगवान, अजय मिश्रा, विशेष सचिव गृह निवेदिता कुकरेती एवं अन्य आश्रम उपस्थित थे।
