सम्पादक :- दीपक मदान।
सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, से-2, भेल, रानीपुर, हरिद्वार में आज गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में राष्ट्रीय एकता, अहिंसा और सेवा के प्रतीकों, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानाचार्य लोकेंद्र दत्त अंथवाल द्वारा माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात् उन्होंने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम का संचालन आचार्य प्रवीण कुमार ने कुशलतापूर्वक किया, जिसने समारोह को सुचारु और प्रेरणादायी बनाया।
राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के कार्यक्रम अधिकारी दीपक कुमार ने अपने विस्तृत भाषण में गांधी जी और शास्त्री के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलकर न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि विश्व को शांति और समानता का संदेश दिया। उनकी स्वच्छता और स्वदेशी की नीति आज भी हमारे लिए प्रासंगिक है। हमें उनके स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।” शास्त्री के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी सादगी और ईमानदारी से देश को एक नई दिशा दी। उनका ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा आज भी हमारे सैनिकों और किसानों के प्रति सम्मान को दर्शाता है। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश सेवा में योगदान देना चाहिए।” उन्होंने छात्रों से इन महान नेताओं के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।
अंत में, प्रधानाचार्य लोकेंद्र दत्त अंथवाल ने अपने प्रेरणादायी और विस्तृत भाषण में दोनों महान नेताओं के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “महात्मा गांधी ने हमें सिखाया कि सत्य और अहिंसा के बल पर सबसे बड़ी लड़ाइयाँ जीती जा सकती हैं। उनका जीवन हमें आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और सामाजिक समानता का पाठ पढ़ाता है। हमें उनके द्वारा शुरू किए गए स्वच्छता अभियान को और अधिक गति देनी चाहिए ताकि उनका सपना साकार हो सके।” शास्त्री के योगदान पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी सादगी और दृढ़ निश्चय से देश को एक नया नेतृत्व प्रदान किया। 1965 के युद्ध के दौरान उनकी नेतृत्व क्षमता और ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा आज भी हमें प्रेरित करता है। उनकी सादगी और देशभक्ति का उदाहरण हमें यह सिखाता है कि छोटे-छोटे कार्यों से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।” उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे इन महान व्यक्तित्वों के आदर्शों को न केवल समझें, बल्कि उन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाकर समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करें।
कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन न केवल इन महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि देने का अवसर था, बल्कि युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरित करने और सामाजिक जिम्मेदारी का बोध कराने का एक प्रभावी मंच भी साबित हुआ।
