सुधार संवाद
हरिद्वार /सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, सेक्टर-2, भेल रानीपुर, हरिद्वार में विद्या भारती के नवनियुक्त संगठन मंत्री सुनील और हरिद्वार विभाग के विभाग प्रचारक राकेश की उपस्थिति में रानीपुर तथा मायापुर स्थित विद्या मंदिरों और शिशु मंदिरों के शिक्षकों की परिचयात्मक बैठक आयोजित की गई। कार्यक्रम में चारों विद्यालयों के लगभग 170 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया।

समारोह का शुभारंभ संगठन मंत्री सुनील, विभाग प्रचारक राकेश और चारों विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने मां सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया। इसके उपरांत विद्यालय के प्रधानाचार्य लोकेंद्र दत्त अन्थवाल ने संगठन मंत्री एवं विभाग प्रचारक को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

परिचय सत्र के पश्चात अपने संबोधन में संगठन मंत्री सुनील ने शिक्षा के साथ संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण की अनिवार्यता पर जोर दिया। स्वामी विवेकानंद के शिकागो सम्मेलन के ऐतिहासिक भाषण का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा ने विश्व को सदैव मानवता, सहिष्णुता और एकता का संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्या भारती के शिक्षण संस्थान केवल उच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र तैयार नहीं करते, बल्कि ऐसे मेधावी नागरिकों का निर्माण करते हैं जो राष्ट्रनिष्ठ, संस्कारवान और सामाजिक रूप से उत्तरदायी हों।

उन्होंने कहा कि परीक्षा में 90 प्रतिशत अंक अर्जित करने वाला विद्यार्थी आवश्यक नहीं कि व्यावहारिक और सामाजिक जीवन में भी उतना ही कुशल हो। शिक्षक की वास्तविक सफलता छात्र के समग्र व्यक्तित्व विकास में निहित है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षण कार्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास और सही दिशा से जोड़ना शिक्षक का प्राथमिक दायित्व है।
