सुधार संवाद
हरिद्वार: जनपद के कोतवाली नगर क्षेत्र में महिला एवं बाल अपराधों के प्रति अपनाई जा रही सख्त कार्रवाई के तहत एक महत्वपूर्ण मामले में माननीय विशेष न्यायालय पॉक्सो ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह की ज़ीरो टॉलरेंस नीति के अंतर्गत पुलिस की प्रभावी विवेचना और पुख्ता साक्ष्य संकलन के चलते दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही, दोषी पर 50,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।

घटना और त्वरित पुलिस कार्रवाई:
कोतवाली नगर क्षेत्र में 16 जनवरी 2026 को एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की तहरीर प्राप्त हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मु.अ.सं.- 29/2026, धारा 65(2)(ड) BNS एवं 5(ड)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत अभियोग पंजीकृत किया। त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़िता का तत्काल सरकारी अस्पताल, हरिद्वार में मेडिकल परीक्षण कराया गया और साक्ष्यों को सुरक्षित किया गया।

गिरफ्तारी और मजबूत विवेचना:
कोतवाली नगर पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए घटना के दिन यानी 16 जनवरी 2026 को ही आरोपी सूरज प्रकाश पोखरियाल पुत्र वीरेंद्र पोखरियाल (मूल निवासी: घटियाली, पौड़ी गढ़वाल; हाल पता: भारत माता पुरम कॉलोनी, भूपतवाला, कोतवाली नगर, हरिद्वार) को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था। इस प्रकरण की विवेचना महिला उपनिरीक्षक (म0उ0नि0) निशा सिंह द्वारा की गई। विवेचक ने सभी वैज्ञानिक और साक्ष्यों का विधिवत संकलन करते हुए मात्र डेढ़ महीने के भीतर, यानी 02 मार्च 2026 को माननीय न्यायालय के समक्ष आरोप-पत्र दाखिल कर दिया।
न्यायालय का फैसला:
माननीय विशेष न्यायालय पॉक्सो में चली विचारण प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण करने के बाद, न्यायालय ने 09 सितंबर 2026 को आरोपी सूरज प्रकाश पोखरियाल को दोषी करार दिया। अदालत ने त्वरित न्याय का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। मात्र 8 माह के भीतर इस मामले में आए फैसले से यह साबित होता है कि हरिद्वार पुलिस बाल अपराधों के खिलाफ कितनी संवेदनशीलता और सख्ती से कार्य कर रही है।
