दीपक मदान
कुल्लू : समाज सेवा की राह पर चलते हुए किसी के आंसू पोंछना और किसी के अंधेरे जीवन में शिक्षा की लौ जलाना ही सच्ची मानवता है। इस संकल्प को चरितार्थ कर रही हैं सीमा सांख्यान, जो आज अपने ‘बिटिया फाउंडेशन’ के माध्यम से जिला कुल्लू के आनी क्षेत्र समेत प्रदेश की सैकड़ों गरीब और बेसहारा बेटियों के लिए ‘मायके’ की ढाल बनकर उभरी हैं।

शिक्षा से लेकर कन्यादान तक का सफर
सीमा सांख्यान का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना मात्र नहीं है, बल्कि वह बेटियों को आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी बनाने के मिशन पर काम कर रही हैं। फाउंडेशन के माध्यम से:
शिक्षा और स्वास्थ्य: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मेधावी छात्राओं की पढ़ाई का खर्च उठाना।
आत्मनिर्भरता: बेटियों को कौशल विकास से जोड़कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना।
सामूहिक विवाह एवं सहायता: जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने (विवाह) में फाउंडेशन न केवल आर्थिक मदद देता है, बल्कि एक अभिभावक की भूमिका भी निभाता है।
”बेटियां समाज का आधार हैं। यदि उन्हें सही मंच और थोड़ा सा सहारा मिल जाए, तो वे आसमान छूने का माद्दा रखती हैं। बिटिया फाउंडेशन का हर प्रयास उन बेटियों को समर्पित है जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को दम तोड़ने पर मजबूर हैं।” — सीमा सांख्यान, संस्थापिका, बिटिया फाउंडेशन

समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत
सीमा सांख्यान का यह निस्वार्थ प्रयास अब एक जन-आंदोलन का रूप ले रहा है। समाज के विभिन्न बुद्धिजीवी और नागरिक उनके इस कार्य की सराहना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में जब लोग अपनी जिम्मेदारियों से कतराते हैं, ऐसे में सीमा सांख्यान का आगे बढ़कर बेटियों का ‘मायका’ बनना नारी सशक्तिकरण की एक बेहतरीन मिसाल है।
आज ‘बिटिया फाउंडेशन’ न केवल मुस्कान बांट रहा है, बल्कि उन हजारों बेटियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बन गया है जो समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
