सुधार संवाद
देहरादून:/साइबर ठगी के नेटवर्क पर नकेल कसने के लिए उत्तराखंड पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और साइबर विंग ने एक बड़े प्रदेशव्यापी अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर 24 अगस्त से 01 सितंबर 2026 तक चलाए गए ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट’ के दौरान मनी म्यूल खातों (Mule Accounts), संदिग्ध सिम-पॉस और एटीएम-चेक निकासी के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई। इस अभियान में कुल 159 एफआईआर दर्ज कर 10 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कई अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।

इंटेलिजेंस आधारित ग्राउंड एक्शन
अभियान की सफलता के पीछे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), दूरसंचार विभाग (DoT) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिले वित्तीय और तकनीकी डेटा का सटीक विश्लेषण रहा। 1 जुलाई से 31 जुलाई तक चले ‘साइबर सुरक्षा अभियान’ के दौरानजुटाई गई जानकारियों और I4C के रियल-टाइम जीआईएस-बेस्ड ‘प्रतिमबिंब मैप’ (PRATIBIMB Map) के जरिए हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए। इसके बाद पुलिस ने मैदानी स्तर पर उतरकर व्यापक कार्रवाई को अंजाम दिया।

अभियान के प्रमुख आंकड़े:
संदिग्ध बैंक खाते: 820 खातों का सत्यापन कर 159 एफआईआर दर्ज की गईं।
एटीएम निकासी स्थल: 1,236 स्थानों का सत्यापन कर 32 एफआईआर दर्ज की गईं।
चेक निकासी स्थल: 84 स्थानों का सत्यापन कर 37 एफआईआर दर्ज की गईं।
सिम और आईएमईआई: 644 संदिग्ध सिम और 630 आईएमईआई ब्लॉक किए गए; 442 मामलों का सत्यापन हुआ।
सिम-पॉस (POS): 22 संदिग्ध स्थानों की जांच के बाद 10 एफआईआर दर्ज की गईं।
हरिद्वार में ‘नवादा ग्रुप’ का भंडाफोड़
ऑपरेशन के दौरान हरिद्वार की श्यामपुर पुलिस ने एक बड़े संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क ‘नवादा ग्रुप’ का खुलासा करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। तकनीकी जांच में इस गिरोह से जुड़े 200 से अधिक बैंक खातों का पता चला है, जिनमें ठगी की रकम सीधे लेयर-01 में ट्रांसफर होती थी। आरोपियों के पास से 45 से अधिक एटीएम कार्ड, 20 पासबुक, 2 लैपटॉप और 17 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। यह गिरोह लोन और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर ठगी की रकम को म्यूल खातों में मंगाकर एटीएम और सीडीएम के जरिए खपाता था।

इसी तरह, एक अन्य मामले में कोटद्वार पुलिस ने फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर 3.86 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपी आशीष रिचर्ड को पौड़ी से गिरफ्तार किया। उसके 8 बैंक खातों में लगभग 1.50 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिले हैं, और देश के कई राज्यों में उसके खिलाफ 19 शिकायतें दर्ज हैं।

समन्वय और तकनीकी मदद से कस रहा शिकंजा
समन्वय पोर्टल: वर्ष 2026 में 240 साइबर अपराधियों का डेटा I4C के समन्वय पोर्टल पर अपलोड कर 100 से अधिक अंतरराज्यीय लिंक स्थापित किए गए हैं।
सीआईएआर (CIAR): अन्य राज्यों के साथ समन्वय के लिए बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत 303 नोटिस बाहर भेजे गए और 247 नोटिस उत्तराखंड पुलिस द्वारा तामील कराए गए।
ठगी की रकम होल्ड: 1930 / एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल के माध्यम से इस वर्ष अब तक कुल 23.44 करोड़ रुपये की ठगी की रकम को समय रहते होल्ड या रिकवर कराया गया है।

एन्फोर्समेंट के साथ जागरूकता पर जोर
कड़ी कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस जन-जागरूकता पर भी विशेष ध्यान दे रही है। हाल ही में आयोजित वर्चुअल साइबर जागरूकता कार्यक्रम में प्रदेश के 1,100 से अधिक राजकीय विद्यालयों के 1.75 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। डीजीपी दीपम सेठ ने विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें एआई, डीपफेक और डिजिटल अरेस्ट जैसे खतरों के प्रति सतर्क रहने की अपील की।

उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट’ के संपन्न होने के बाद भी साइबर अपराधियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ यह अभियान निरंतर और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगा।
