दीपक मदान
देहरादून: राजधानी के अधिवक्ताओं और जिलाधिकारी (DM) के बीच का विवाद अब और गहरा गया है। शनिवार को बार एसोसिएशन देहरादून की आम सभा में वकीलों ने एक स्वर में जिलाधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राजस्व न्यायालयों के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है।

मुख्य विवाद का कारण
यह आक्रोश पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमचंद शर्मा के लाइसेंस निरस्तीकरण की संस्तुति के बाद भड़का है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि जिलाधिकारी की यह कार्रवाई न केवल अनुचित है, बल्कि पूरे अधिवक्ता समुदाय के सम्मान और गरिमा पर सीधा प्रहार है।
आम सभा के बड़े निर्णय:
स्थानांतरण तक हड़ताल: वकीलों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक जिलाधिकारी का जनपद से स्थानांतरण (Transfer) नहीं हो जाता, तब तक कोई भी अधिवक्ता राजस्व न्यायालयों में पैरवी नहीं करेगा।

एकजुटता का संदेश: पदाधिकारियों ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि ‘बार’ के स्वाभिमान की लड़ाई है।
कामकाज ठप: विरोध के चलते शनिवार को बस्ते, टाइपिंग कार्य और स्टांप वेंडर का काम पूरी तरह बंद रहा, जिससे तहसील और अन्य कार्यालयों में पहुंचे फरियादियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
न्यायिक कार्यों पर असर
विधि भवन में आयोजित इस सभा में भारी संख्या में जुटे वकीलों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर अदालती कार्यों से विरत रहने का फैसला लिया। इस विरोध के कारण राजस्व से जुड़े सैकड़ों मामलों की सुनवाई टल गई है।
”अधिवक्ता समुदाय अपनी गरिमा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। जब तक तानाशाही रवैया खत्म नहीं होता और जिलाधिकारी का तबादला नहीं होता, बहिष्कार जारी रहेगा।” > — बार एसोसिएशन, देहरादून
