[ब्यूरो रिपोर्ट: सुधार संवाद, हरिद्वार]
हरिद्वार। धर्मनगरी में इन दिनों एक ऐसा ‘अधर्म’ फल-फूल रहा है, जिसकी गूँज शासन से लेकर प्रशासन तक सुनाई दे रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल सन्नाटा है। शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों को मिलने वाले हक पर ‘भ्रष्टाचार के गिद्ध’ मंडरा रहे हैं। ₹40,000 से ₹50,000 महीना कमाने वाले लोग महज ₹5,000 की रिश्वत देकर ₹55,000 सालाना आय का फर्जी प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं।

रिश्वत का ‘रेट कार्ड’: ₹5000 दो और ‘गरीब’ बन जाओ
सूत्रों और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, आय प्रमाण पत्र बनाने वाले कार्यालयों में दलालों और भ्रष्ट अधिकारियों का गठजोड़ सक्रिय है। चौंकाने वाली बात यह है कि एक ठेले लगाने वाला भी आज ₹1500-2000 प्रतिदिन का व्यापार करता है, लेकिन सरकारी फाइलों में वह ₹5000 सालाना आय वाला ‘अति निर्धन’ नजर आता है। क्या प्रशासन को वाकई लगता है कि आज के दौर में ₹4000 महीने में किसी का घर चल सकता है?
सिस्टम का ‘पल्ला झाड़ो’ अभियान
आरोप है कि इस खेल में ऊपर से नीचे तक अधिकारी शामिल हैं। जब भी घोटाले की बात उठती है, सरकारी विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
खाद्य आपूर्ति विभाग की सुस्ती: क्या खाद्य विभाग इन ‘कागजी गरीबों’ के रहन-सहन और दुकानों का सैंपल या भौतिक सत्यापन नहीं करता? या फिर मोटी रकम लेकर फाइलों को दबा दिया जाता है?
राजनीतिक संरक्षण: चर्चा है कि इस फर्जीवाड़े के तार कई सफेदपोश नेताओं से भी जुड़े हैं, जिनकी जेबें इस कमीशन के खेल से गर्म हो रही हैं।
हिंदू-मुस्लिम की राजनीति बनाम असली मुद्दे
आज जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक हम धर्म की राजनीति के पीछे छिपकर शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों की बलि चढ़ाते रहेंगे? असली देशभक्ति देश के बच्चों को अच्छी शिक्षा और मिलावट रहित खान-पान देना है, न कि नफरत की राजनीति करना। भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं की मिलीभगत ने शिक्षा विभाग को ‘कमाई का अड्डा’ बना दिया है।
प्रशासन से तीखे सवाल:
₹55,000 का फर्जी एफिडेविट बनाने वाले अधिकारियों पर विजिलेंस जांच क्यों नहीं होती?
क्या प्रशासन तब जागेगा जब गरीब का बच्चा मजदूरी करने पर मजबूर हो जाएगा और अमीर का बच्चा उसकी सीट पर मुफ्त पढ़ेगा?
खाद-रसद विभाग और शिक्षा विभाग के बीच तालमेल की कमी का फायदा भ्रष्टाचार उठाने वालों को क्यों मिल रहा है?
निष्कर्ष:
हरिद्वार प्रशासन और उत्तराखंड सरकार को अब नींद से जागना होगा। अगर इन ‘सफेदपोश गरीबों’ और भ्रष्ट अधिकारियों की पोल नहीं खुली, तो आने वाली नस्लें हमें कभी माफ नहीं करेंगी। शिक्षा का व्यापार बंद करो और गरीबों का हक उन्हें वापस दो।
