दीपक मदान
हरिद्वार: गंगा की पावन गोद में बसे हरिद्वार में ऐसे कई व्यक्तित्व हैं जो शोर-शराबे से दूर रहकर मानवता की सेवा में समर्पित हैं। इन्हीं में एक प्रमुख नाम है पंडित पंकज अधिकारी। तीर्थ पुरोहित के रूप में अपनी परंपराओं का निर्वहन करने वाले पंडित पंकज अधिकारी केवल एक धार्मिक मार्गदर्शक ही नहीं, बल्कि एक ऐसे संवेदनशील समाजसेवी हैं, जो बिना किसी दिखावे या सोशल मीडिया की चकाचौंध के निरंतर गरीबों और असहायों की सेवा में तत्पर रहते हैं।

निस्वार्थ सेवा की प्रतिमूर्ति
पंडित पंकज अधिकारी की कार्यशैली उन्हें अन्य लोगों से अलग बनाती है। सोशल मीडिया के युग में जहाँ हर कार्य का प्रदर्शन किया जाता है, वहीं पंडित पंकज अधिकारी का मानना है कि “दाएं हाथ से किया गया दान बाएं हाथ को भी पता नहीं चलना चाहिए।” वे अपनी सेवा को केवल ईश्वर के प्रति एक कर्तव्य मानते हैं।

असहायों का सहारा: हरिद्वार में आने वाले तीर्थयात्री हों या स्थानीय गरीब वर्ग, पंडित पंकज अधिकारी हर उस व्यक्ति के काम आते हैं जो उम्मीद लेकर उनके पास पहुंचता है।
गोपनीय सेवा: बिना किसी फोटो या वीडियो की चाहत के, वे चुपचाप जरूरतमंदों को राशन, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सहायता पहुँचाने का कार्य करते हैं।
धार्मिक निष्ठा और जनसेवा का संगम: तीर्थ पुरोहित के रूप में अपनी पूरी मर्यादा और निष्ठा के साथ पूजा-पाठ कराने के साथ-साथ, वे समाज सेवा को भी अपना धर्म समझते हैं।
पूज्य मुरारी बापू का सानिध्य
हाल ही में हरिद्वार पधारे मानस मर्मज्ञ पूज्य मोरारी बापू के श्रीचरणों में नमन करने और उनका पावन आशीर्वाद प्राप्त करने के अवसर पर पंडित पंकज अधिकारी ने अपनी सादगी और भक्ति का परिचय दिया। पूज्य बापू का सानिध्य प्राप्त करना उनके लिए एक आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बना है, जो उन्हें समाज कल्याण के कार्यों के लिए और अधिक प्रेरित करता है।

जनमानस में आदर का भाव
स्थानीय लोग उन्हें ‘संकटमोचक’ की दृष्टि से देखते हैं। हर किसी के दुख-दर्द में काम आने वाला उनका निर्मल स्वभाव ही है, जिसके कारण आज वे हरिद्वार के सबसे विश्वसनीय और सम्मानित व्यक्तित्वों में से एक बन गए हैं। वे न केवल एक पुरोहित हैं, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक हैं जो कठिन परिस्थितियों में लोगों को सही रास्ता दिखाते हैं।
पंडित पंकज अधिकारी जैसे व्यक्तित्व आज के समाज के लिए प्रेरणा हैं। यह सिद्ध करता है कि वास्तविक सेवा के लिए किसी बड़े मंच या सोशल मीडिया की नहीं, बल्कि केवल एक शुद्ध और दयालु हृदय की आवश्यकता होती है।
