दीपक मदान
चमोली (उत्तराखंड): हिमालय की दुर्गम चोटियों पर स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल, हेमकुंड साहिब की यात्रा इस वर्ष 23 मई से शुरू होने जा रही है। भीषण ठंड और भारी बर्फबारी के बीच प्रशासन, सेना और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। तैयारियों का जायजा लेने के लिए बुधवार को गोविंदघाट से दरबार साहिब तक एक संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया।

युद्धस्तर पर बर्फ की कटाई
वर्तमान में अटलाकोटी से लेकर दरबार साहिब तक का पूरा मार्ग कई फीट गहरी बर्फ की चादर से ढका हुआ है। भारतीय सेना के जवान इन विषम परिस्थितियों में भी ‘ग्लेशियर’ काटकर रास्ता बनाने के कार्य में जुटे हैं। निरीक्षण दल ने सेना के साथ मिलकर बर्फ से ढके रास्तों को पार किया और दरबार साहिब परिसर की व्यवस्थाओं का बारीकी से मूल्यांकन किया।
सुरक्षा और यातायात का नया ब्लूप्रिंट
चमोली पुलिस ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट का नया खाका तैयार किया है:
पार्किंग प्रबंधन: पुलना गाँव, जहाँ तक वाहनों की पहुंच है, वहां पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि जाम की स्थिति न बने।
पुलिस चौकियों का पुनर्संचालन: शीतकाल में बंद रहने वाली भ्यूंडार और घांघरिया पुलिस चौकियों को फिर से सक्रिय किया जा रहा है। यहाँ संसाधनों और संचार व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया गया।

फूलों की घाटी पर नजर: इसी मार्ग से ‘वैली ऑफ फ्लावर्स’ का रास्ता भी जुड़ा है। पर्यटकों की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा इंतजामों पर जोर दिया है।
’मित्रता, सेवा और सुरक्षा’ का संकल्प
एसपी चमोली, सर्वजीत सिंह पंवार के निर्देशन में पुलिस प्रशासन इस दुर्गम यात्रा को ‘जीरो एरर’ के साथ संपन्न कराने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता केवल यात्रा शुरू करना नहीं, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।
निरीक्षण दल में गोविंदघाट गुरुद्वारे के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह, प्रभारी निरीक्षक चित्रगुप्त और उपनिरीक्षक अमनदीप सिंह सहित सेना के जांबाज जवान शामिल रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बदलती परिस्थितियों और मौसम के मिजाज को देखते हुए पल-पल की निगरानी की जा रही है।
प्रमुख बिंदु (Quick Facts):
कपाट खुलने की तिथि: 23 मई 2026।
निरीक्षण मार्ग: गोविंदघाट से दरबार साहिब (लगभग 19 किमी का ट्रैक)।
चुनौती: अटलाकोटी के पास भारी हिमपात और ग्लेशियर।
