सम्पादक :- दीपक मदान
देहरादून | सुधार संवाद ब्यूरो
उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में तकनीक का समावेश स्वागत योग्य है, लेकिन इसके साथ ही धरातल पर बच्चों की पढ़ाई और अभिभावकों की जेब पर पड़ रहे निजी स्कूलों के आर्थिक बोझ को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत विभाग को ऑनलाइन अवकाश प्रणाली से जोड़कर ‘ई-गवर्नेंस’ की ओर ले जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनता की मांग है कि शिक्षा व्यवस्था में NCERT की अनिवार्यता को सख्ती से लागू किया जाए।
छुट्टी अब एक क्लिक पर, सुशासन की ओर बढ़ते कदम
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट किया है कि अब शिक्षकों को अवकाश के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन छुट्टी प्रबंधन मॉड्यूल जल्द शुरू होगा। मंत्री जी का मानना है कि इससे पारदर्शिता आएगी और शिक्षक अपना अधिक समय शिक्षण कार्य को दे सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों को इसे तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं।
पढ़ाई का स्तर और NCERT बनाम प्राइवेट पब्लिशर्स का खेल
सुधार संवाद के माध्यम से यह बात प्रमुखता से उठाई जा रही है कि डिजिटल सुशासन के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना आवश्यक है। वर्तमान में देखा जा रहा है कि:
महंगी निजी किताबें: कई निजी स्कूल सरकारी निर्देशों के बावजूद प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें थोप रहे हैं।
अभिभावकों पर बोझ: जो कोर्स NCERT की किताबों से 500-700 रुपये में पूरा हो सकता है, निजी स्कूलों की ‘कमीशन वाली किताबों’ के कारण वही सेट 5,000 से 7,000 रुपये तक पहुँच रहा है।
समान शिक्षा का अभाव: शिक्षा मंत्री को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है कि जब बोर्ड परीक्षाएं और प्रतियोगी परीक्षाएं (जैसे NEET, JEE) NCERT आधारित होती हैं, तो प्राइवेट स्कूलों को महंगी किताबें चलाने की छूट क्यों दी जा रही है?
जनता की आवाज़: केवल नियम नहीं, सख्ती भी जरूरी
शिक्षा विभाग में सुधार केवल ऑनलाइन छुट्टी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आम जनता और अभिभावकों की अपेक्षा है कि शिक्षा मंत्री इस ओर भी कड़ा कदम उठाएं ताकि:
सख्ती से लागू हो NCERT: हर स्कूल में सिर्फ और सिर्फ NCERT की किताबें ही अनिवार्य हों।
आर्थिक राहत: मध्यमवर्गीय परिवारों को निजी स्कूलों की मनमानी से मुक्ति मिले।
शिक्षा का व्यवसायीकरण रुके: किताबों और ड्रेस के नाम पर चल रहे व्यापार पर लगाम लगे।
संपादकीय टिप्पणी:
डिजिटल इंडिया के दौर में छुट्टी ऑनलाइन होना अच्छी बात है, लेकिन यदि गरीब और मध्यम वर्ग का बच्चा महंगी किताबों के अभाव में पिछड़ जाए, तो ‘सुशासन’ अधूरा है। आशा है कि शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत इस ‘किताब माफिया’ पर भी ‘एक क्लिक’ वाला कड़ा प्रहार करेंगे ताकि प्रदेश का हर बच्चा सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पा सके।
