सम्पादक :- दीपक मदान
सरस्वती विद्या मंदिर इण्टर कॉलेज, सेक्टर-2, बीएचईएल रानीपुर, हरिद्वार में स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास, राष्ट्रभक्ति एवं देशप्रेम की भावना के साथ धूमधाम से मनाया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम सिंह द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान से वातावरण देशभक्ति से ओत-प्रोत हो गया। कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती एवं भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा सरस्वती वंदना के साथ हुआ।

इस अवसर पर प्रांतीय प्रतिनिधि दीपक सिंघल, सुनील चौहान, शेर सिंह, सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज सेक्टर-2 के कोषाध्यक्ष रोहित भाटिया, सरस्वती शिशु मंदिर के कोषाध्यक्ष विष्णु तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य लोकेंद्र दत्त अन्थवाल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। इस अवसर पर विद्यालय के लगभग 1100 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। उन्होंने देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत, नृत्य, भाषण एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान पूरा विद्यालय परिसर भारत माता की जय एवं वंदे मातरम् के उद्घोष से गूंज उठा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पदम सिंह ने विद्यार्थियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 15 अगस्त केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिनके संघर्ष के कारण आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के साथ कर्तव्य भी जुड़ा हुआ है। देश की प्रगति केवल सरकार या किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। विद्यार्थियों को अपने जीवन में अनुशासन, परिश्रम, ईमानदारी, संस्कार और राष्ट्रप्रेम को अपनाकर देश के निर्माण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने सभी का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने जीवन में ऐसे लक्ष्य निर्धारित करें जिससे उनके परिवार, विद्यालय और राष्ट्र को उन पर गर्व हो। उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल के भारत का निर्माता है, इसलिए विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अपने संस्कारों और भारतीय संस्कृति से भी जुड़कर रहना चाहिए।

पदम सिंह ने अपने संबोधन में पांच महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि हमें यह विचार करना चाहिए कि हम केवल अपने लिए जी रहे हैं या अपने परिवार और समाज के लिए भी हमारी कोई जिम्मेदारी है। उन्होंने जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण को आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए विद्यार्थियों से जल की प्रत्येक बूंद को बचाने और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने का आह्वान किया। उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम सब एक हैं और भारत की एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। अंत में उन्होंने कहा कि हम सभी भारत माता की संतान हैं, तो फिर ऊंच-नीच का भेदभाव कैसे हो सकता है। हमें जाति, वर्ग और अन्य भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करना चाहिए।

विद्यालय के प्रधानाचार्य लोकेंद्र दत्त अन्थवाल ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वतंत्रता हमें महान स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान से प्राप्त हुई है। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम इस स्वतंत्रता के महत्व को समझें और राष्ट्रहित को सदैव सर्वोपरि रखें।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी बोध होना चाहिए। समय का सदुपयोग, अनुशासन, श्रेष्ठ चरित्र, मेहनत, पर्यावरण संरक्षण तथा समाज के प्रति संवेदनशीलता एक जिम्मेदार नागरिक के प्रमुख गुण हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने आचरण और उपलब्धियों के माध्यम से देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने का संकल्प लें। प्रधानाचार्य ने कहा कि भारत आज विश्व में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है और आने वाले समय में देश को और अधिक ऊंचाइयों तक पहुंचाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ें।

कार्यक्रम का संयुक्त संचालन श्रीमती मंजू एवं दिव्या ने किया। भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं देशभक्ति के वातावरण के बीच कार्यक्रम संपन्न हुआ। विद्यालय परिवार ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए समर्पित रहने का संकल्प लिया।
