सुधार संवाद
देहरादून / मिड-कैरियर ट्रेनिंग प्रोग्राम (एमसीटीपी-III) के तहत उत्तराखंड के आधिकारिक दौरे पर आए भारत के तीन वरिष्ठ राजनयिकों ने आज देहरादून स्थित सरदार पटेल भवन में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ से शिष्टाचार भेंट की। इस उच्चस्तरीय बैठक में जाम्बिया में भारत के उच्च आयुक्त आलोक रंजन झा, लिथुआनिया में भारत के राजदूत देवेश उत्तम और जमैका में भारत के उच्च आयुक्त मयंक जोशी शामिल रहे। इस दौरान सामरिक रूप से संवेदनशील सीमा सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और अत्याधुनिक तकनीक से लैस साइबर पुलिसिंग के मुद्दों पर गहन मंथन हुआ।

विशिष्ट भौगोलिक चुनौतियों और सुरक्षा प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा
बैठक की शुरुआत करते हुए डीजीपी दीपम सेठ ने राजनयिकों को देवभूमि उत्तराखंड की अनूठी भौगोलिक परिस्थितियों से अवगत कराया। उन्होंने राज्य पुलिस द्वारा संचालित आपदा राहत एवं बचाव अभियानों, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के सुरक्षा प्रबंधन और वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की।

इसके अलावा, दुनिया भर में चर्चित चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के दौरान अचूक सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन के लिए अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।
आधुनिक तकनीक और वैश्विक अनुभवों का आदान-प्रदान
डीजीपी ने तकनीक-आधारित पुलिसिंग को आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। उन्होंने ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से实时 (real-time) निगरानी, उन्नत यातायात प्रबंधन, त्वरित आपदा प्रतिक्रिया तंत्र (QRT), साइबर सुरक्षा और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय को प्रभावी पुलिसिंग का मूल आधार बताया। राज्य में तेजी से बढ़ रहे पर्यटन और तीर्थाटन के मद्देनजर सुरक्षित और सुचारु व्यवस्थाओं को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ।

दूसरी ओर, तीनों वरिष्ठ राजनयिकों ने जाम्बिया, लिथुआनिया और जमैका की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं के साथ-साथ वहां की प्रशासनिक तथा सुरक्षा प्रणालियों की अनूठी जानकारियों को साझा किया। भारत और इन मित्र देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने, सुरक्षा, तकनीक, आपदा प्रबंधन और वैश्विक ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ के पारस्परिक आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी सकारात्मक सहमति बनी।
वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर मंथन
बातचीत के दौरान बदलते अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य, सीमाओं पार से उत्पन्न होने वाले साइबर अपराधों और आपदा प्रबंधन में आधुनिक तकनीक के बढ़ते दखल जैसे समसामयिक विषयों पर भी सार्थक संवाद हुआ।
बैठक के अंत में डीजीपी ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के उच्च-स्तरीय संवादों से पुलिसिंग और सुरक्षा तंत्र को वैश्विक दृष्टिकोण और श्रेष्ठ तौर-तरीकों से समृद्ध होने का अवसर मिलता है, जिससे भविष्य में पारस्परिक सहयोग के नए द्वार खुलते हैं।
