सुधार संवाद : ब्यूरो
हरिद्वार के भूपतवाला स्थित ऐतिहासिक अमेरिकन आश्रम (स्वामी देवानंद ट्रस्ट) की संपत्तियों को लेकर उपजा विवाद अब तूल पकड़ चुका है। इस बहुचर्चित मामले में करोड़ों रुपए के वित्तीय लेनदेन और भू-माफियाओं द्वारा संपत्तियों को खुर्द-बुर्द किए जाने की चर्चाओं ने शहर का राजनीतिक और सामाजिक पारा चढ़ा दिया है। स्थानीय जनता और जनप्रतनिधियों की निगाहें अब जिला प्रशासन के कड़े कदमों पर टिकी हैं।

भूपतवाला क्षेत्र स्थित यह आश्रम सौ साल से अधिक पुराना है, जिससे देश-विदेश के श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों की गहरी आस्था जुड़ी रही है। यहां अतीत में गरीबों के लिए भंडारे, निशुल्क चिकित्सा और धर्मशाला जैसी जनहित सेवाएं संचालित होती थीं।

आरोप है कि इस बेशकीमती धार्मिक संपत्ति को सुनियोजित तरीके से गुप्त अनुबंधों के तहत हथियाने के प्रयास किए गए हैं। चर्चा यह भी है कि इस पूरे खेल में रईसजादों द्वारा करोड़ों रुपए का ऐसा कायापलट किया गया है जिससे विरोधी खेमे की आवाजें शांत रहें। स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया है कि आश्रम की भूमि को अन्य परिसंपत्तियों में मिलाने के लिए रातोंरात दीवारें या शीटें खड़ी करने के प्रयास किए गए, जिससे आवाम में जबर्दस्त रोष है।

इस गंभीर मामले को लेकर स्थानीय पार्षदों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित तथा एसएसपी नवनीत सिंह भुल्ler से औपचारिक मुलाकात कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मांग की गई है कि इस पूरे सिंडिकेट के वित्तीय दस्तावेजों और रजिस्ट्री की एसआईटी या उच्चस्तरीय जांच हो।

जनता का साफ कहना है कि यदि ट्रस्ट निष्क्रिय है या उसके कोई वैध वारिस सामने नहीं आते हैं, तो इस करोड़ों की जनोपयोगी भूमि को राज्य सरकार के संरक्षण में लेकर जनहित के कार्यों के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए।
